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Thursday, 15 November 2018

नाबालिग से बालिग- झारखण्ड के 18 साल


 मोर अठरा साल होई गेलक रे!!

जी हाँ, 15 नवंबर, 2000 में बना झारखंड आज 18 वर्षों का हो गया है। यूँ तो झारखंड, बिहार का एक भाग था जो उससे अलग हो गया। पर आज देश-दुनिया में इसकी भी अपनी एक अलग पहचान है। पर कहीं-न-कहीं ये पहचान राजनैतिक उठा-पटक के परदे तले छुप गयी है। प्राकृतिक संपदाओं से परिपूर्ण यह राज्य अपने खनिज की भरपूर मात्रा में उपलब्धता के लिए भी जाना जाता है। मूलतः यहाँ जनजातीय लोगों की अधिक मात्रा और प्रभाव है। झारखंड का अर्थ ही पेड़-पौधों का क्षेत्र है। अतः यहाँ वन संपदा और जनजातीय समाज का अधिक मात्रा में होना लाज़मी है।
खैर, तारीफों के पुल तो हर कोई बाँध देता है। पर वास्तविकता तो यही है कि झारखंड को एक स्थिर सरकार के लिए भी खासी मशक्कत करनी पड़ी। भगवान बिरसा मुंडा के सपने को सच करने की राह बिलकुल भी आसान न रही। और आज भी वो सपना कहीं-न-कहीं अधूरा ही है। विकास की दौड़ में जहाँ भारत के अन्य राज्य आगे बढ़ते जा रहे थे, वहीं कई रूपों में पिछड़ा हुआ यह राज्य बहुत पीछे छूटता दिखाई देता था। झारखण्ड के साथ ही अलग हुआ उत्तराखंड भी विकास के मामले में इससे काफ़ी आगे था।
अंत में जब इसे एक स्थिर सरकार मिली तो फिर तमाम वादों और तसल्लियों के साथ इसे आगे बढ़ाने का काम शुरू हुआ। झारखंड की मुख्य खूबियों में से एक यह है कि यहाँ का हर मुख्य मंत्री जनजातीय समाज का ही रहा है (भले ही इसके पीछे कितना ही राजनैतिक स्वार्थ क्यों न हो!)। वक़्त के साथ यहाँ उद्योग, मल्टी नेशनल कंपनीज़, बड़े- बड़े स्कूल, कॉलेज, अस्पताल सब खुल गए। यहाँ की खनिज सम्पदा का भी भरपूर उपयोग होने लगा। इस ओर एक बड़ा कदम पूरे राज्य में अलग-अलग जगहों पर स्टील उद्योग की स्थापना का था। और आज..यह इस मुकाम पर है जहाँ इसके कई शहरों को 'स्मार्ट सिटी' बनाने की बात की जा रही है।
विकास तो हुआ और हो रहा है, पर ज़मीनी स्तर पर अब भी एक बड़े बदलाव की ज़रूरत है। उम्र के इस दौर पर जब पूरे देश में राजनैतिक उथल-पुथल है, ऐसे में ये देखना रोमांचक होगा कि आने वाले समय में राज्य की सरकार में बदलाव होता है या नहीं, और यदि होता है तो आगे विकास के पैमाने क्या बनते हैं। यह देखना रोमांचक होगा..कि किशोरावस्था से अभी-अभी निकले इस राज्य का यौवन कैसा होगा।

चित्र साभार: झारखंड दर्पण

Thursday, 31 May 2018

जमशेदपुर: सिर्फ एक शहर या कुछ ज्यादा?


जमशेदपुर क्या है? माना कि ये अपने स्टील इंडस्ट्रीज के लिए जाना जाता है, पर क्या ये बस इन्हीं तक सीमित है?
नहीं। जमशेदपुर कहने को तो बस एक इंडस्ट्रियल सिटी है पर यहाँ रहने वाले किसी से पूछ कर देखिये! यादों का और एहसासों का एक ऐसा पिटारा खुलेगा जो आपकी सोच को बदल देगा।
इस क्लीन और ग्रीन सिटी में रहने वाले हर बच्चे का बचपन टाटा ज़ू के उछलते कूदते जानवर और जुबिली पार्क के खूबसूरत गुलाब देखकर बीतता है। ऐसा शायद ही कोई व्यक्ति हो जिसने गोलपहाड़ी मंदिर की चढ़ाई न की हो या साकची बाज़ार की भीड़ में पसीना न बहाया हो। फिर आमबगान में लगने वाला डिज़्नी लैंड मेला कौन भूल सकता है भला! चाहे गणेश पूजा हो या दुर्गा पूजा, यहाँ हर त्यौहार उतनी ही धूमधाम से मनाया जाता है। छठ पूजा का उल्लास और सरस्वती पूजा के वक़्त छोटी-छोटी लड़कियों को साड़ी पहनकर घूमते देखना अलग ही आनंद देता है। जितने अलग यहाँ त्योहारों के नाम हैं, उतने ही निराले ढंग से यहाँ इन्हें मनाया जाता है।
इस समतल ज़मीन से जब बाहर से आये लोगों को दलमा के हरे-भरे पहाड़ नज़र आते है तो उनके लिए इस बात को हज़म करना ज़रा मुश्किल हो जाता है। उस पर खड़काई और दोमुहानि से लगकर बना मरीन ड्राइव सबका मन मोह लेता है। सुबह-शाम राज्य पक्षी कोयल के गानों से भला जमशेदपुर में कौन वाकिफ़ नहीं!?
जिस तरह लोग जमशेदपुर में बसते हैं, उसी तरह यहाँ के हर इंसान में उसका अपना जमशेदपुर बसता है।
यह शहर कहने को तो बहुत पुराना है, पर विकास के इस दौर में यह बदलाव से कदम मिलाकर चला है। समय के साथ यहाँ शौपिंग मॉल, मूवी थिएटर, रेस्ट्रॉन्ट और होटल, ऊँची इमारतें सब बन गए हैं। आज ऐसी कोई चीज़ नहीं जिसके लिए किसी को यहाँ से बहार जाना पड़े। खनिज के उपयोग के साथ-साथ यह शहर चीज़ों की उपयोगिता भी खूब जानता है। इस्तेमाल किये हुए प्लास्टिक के उपयोग से सड़कों का निर्माण इसका मात्र एक उदाहरण भर है।
चाहे सोनारी का साई मंदिर हो या रुसी मोदी सेंटर के सामने का पिरामिड, चाहे जे आर डी टाटा स्पोर्ट्स ग्राउंड हो या बिस्टुपुर का गोपाल मैदान, आकर्षण के केंद्र यहाँ कम नहीं हैं।

ये तो बस तस्वीर का एक भाग है। ऐसे जाने कितने भाग हर जमशेदपुरवासी के अंदर बसते हैं। हर व्यक्ति इस शहर को अलग नज़र से देखता है। हर किसी की अपनी कहानी है, हर किसी के अपने अनुभव। कहने को..तो ये बस एक शहर भर है, पर ये सिर्फ एक शहर नहीं यहाँ के लोगों का एक हिस्सा है।

चित्र: जमशेदपुरसिटी

Trying To Be

I'm not a stranger to myself I'm just trying to be To let someone else Know me The way I tried and lost Though I know myself...