Followers

Showing posts with label वीर. Show all posts
Showing posts with label वीर. Show all posts

Friday, 15 March 2019

मेरी चौखट आज रंगीन है- भाग 2

अच्छा लगता है ना
कभी-कभी रूठ जाना
और नाराज़ होकर
एक कोने में बैठ जाना
इस इंतज़ार में
कि एक फ़ोन आएगा
तुम्हें मनाने के लिए

ना जाने कितनी ही बार
ऐसे ही रूठकर मैं
फ़ोन के इंतज़ार में बैठी हूँ
बिलकुल आज की तरह
पर तुम हो कि
अपना अल्हड़पना छोड़ते ही नहीं
कभी दिनों, कभी हफ्तों
तो कभी महीनों बाद
एक फ़ोन लगाते हो
और कहते हो..
कि जल्दी आऊंगा

पर इस बार
ना तुम्हारा फ़ोन आया
ना ही तुम
ना जाने कब से बैठी हूँ
यूँ ही रूठकर
चलो अब बस भी करो न..
अब थक गई हूँ मैं
तुम्हें पता है..
वो रंगोली अब भी वहीं है
मेरी चौखट को रंगीन बनाती हुई 
सब कहते हैं उसे मिटा देने को
पर मुझे पता है
कि तुम ज़रूर आओगे

अब आ भी जाओ!!

Wednesday, 13 March 2019

मेरी चौखट आज रंगीन है


मेरी चौखट आज रंगीन है
सुबह से बेचैन थी मैं..
क्या करती
तुम आने वाले हो
ये खबर सुनकर
ख़ुशी का ठिकाना ही न रहा
रंग बटोरने लगी
नीले पीले गुलाबी नारंगी
ये रंगोली तुम्हारे लिए ही
बनायी थी
बस अब आना रहा गया है
तुम्हारा
तुम आओगे न?
तुमने वादा किया था मुझसे..
हाँ! मुझे मालूम है तुम आओगे
पर फिर..
सब मान क्यों नहीं रहे?
सब क्यों कहते है तुम नहीं आओगे?
अरे! ऐसे कैसे
बॉर्डर पर ही तो गए थे
तुम्हारा आना तो तय ही था
मैं कहती थी ना तुम्हें
इतना पागलपन सही नहीं है
किसी दिन ले डूबेगी तुम्हें
अपनी माँ से इतना प्यार
कौन करता है भला!
तुम्हारी माँ भी तो फिक्र नहीं
करती तुम्हारी
और सिर्फ तुम्हारी ही क्यों
ना जाने कितने ही बेटे है उसके
सबको यूँ अपनी गोद में सुलाती है
और घर ही नहीं आने देती
और बदले में..
बदले में देती है
गुरुर..गर्व
क्या करूँ मैं इनका
जब तुम ही नहीं हो
चलो अब बातें बहुत हुई
अब जल्दी घर आ जाओ
तुम्हारी रंगोली
और तुम्हारी बीवी
इंतज़ार कर रही है तुम्हारा
तुम्हें अपनी माँ कि गोद से
उठना ही होगा
नहीं तो मैं नाराज़
हो जाऊँगी!!

Trying To Be

I'm not a stranger to myself I'm just trying to be To let someone else Know me The way I tried and lost Though I know myself...