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Thursday, 28 December 2017

महँगी होती इंसानियत

हँस लो यारो
हँसी तुम्हारे आईफोन से भी महँगी होने वाली है
आज लोग आईफोन को तरसते हैं
कल हँसी को तरसेंगे
वो दिन दूर नहीं
जब कह रहे होंगे हम
कि यारो!
साँस ले लो
ऑक्सीजन की कीमत चुकाने का
वक़्त आ गया है
हर चीज़ जिस की कीमत
आज नहीं मालूम है तुम्हें
हर उस चीज़ पर जान लुटाओगे तुम
फिर भी कीमत नहीं
चुका पाओगे तुम
खुद को इंसान कहने वाले ही
प्रकृति की इंसानियत
के बोझ तले
दबे हैं
और कितना खुद को नीचे
गिराओगे तुम
ये जो नाम मिला है तुम्हें
इसने नदी, हवा, धरती, अंबर
मन, शरीर, विचार, शब्द
सबको गंदा कर दिया है
हाँ वो दिन भी दूर नहीं
जब इंसान भी
न कहलाओगे तुम



Tuesday, 26 December 2017

खुद को भी इंसान बनाकर बताओ तो जाने

हाँ पंख नहीं है तुम पे
फिर भी आकाश में उड़ना आसान है
कभी ज़मीन पर बिन लड़खड़ाये
चलकर बताओ तो जाने
हर वक़्त दौड़ते फिरते हो
आगे बढ़ने की होड़ में
एक लम्हा थमकर
जीकर बताओ तो जाने
चेहरे पे चेहरे लगा रखे हैं
कचरे से चेहरा सजाये बैठे हो
कभी अपने-आप को भी सबको
दिखाकर बताओ तो जाने
ईंटों से दीवार बनाते जा रहे
सपनों के संसार बनाते जा रहे
कभी मिट्टी के टीले
बनाकर बताओ तो जाने
हर रोज़ नए मकान सजाते रहते हो
रिश्तों के बाज़ार बनाते जा रहे
मकान तो हर कोई बना लेता है
अपनों से घरबार
बनाकर बताओ तो जाने



Trying To Be

I'm not a stranger to myself I'm just trying to be To let someone else Know me The way I tried and lost Though I know myself...